गायत्री मन्त्रओ3म् भूर्भुवः स्वः तत् सवितुर्वरेण्यं । भर्गो देवस्य धीमहि । धियो यो नः प्रचोदयात् ॥Yajurveda 36.3Om bhurbhuvah svah.Tat savitur varenyam bhargo devasya dhimahi. Dhiyo yo nah prachodyat
हे प्राण स्वरूप, दुःखहर्ता, आनन्द दाता ईश्वर ! हे सकल जगत् के उत्पादक प्रभो ! हम आपके वरण करने योग्य दिव्य गुणों एवं पाप नाशक तेज को धारण करते हैं ।आप हमारी बुद्धियों को सदैव श्रेष्ठ मार्ग पर प्रेरित करें ॥O God! You are Omnipresent, Omnipotent...